कन्या भ्रूण हत्या: एक सीवर में मिले 19 कन्या भ्रूण

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कन्या भ्रूण

मुंबई: महाराष्ट्र पुलिस ने सोमवार को महाराष्ट्र में एक नाले से गर्भपात के बाद फेंके गए 19 कन्या भ्रूण मिलने का दावा किया है। मुंबई पुलिस के इस दावे ने एक बार फिर कन्या भ्रूण हत्या की समस्या पर प्रकाश डाला है।

भारत में जन्म पूर्व लिंग परिक्षण प्रतिबंधित है। यह नियम भारत सरकार ने लड़के की चाहत में हो रही कन्या भ्रूण हत्याओं को रोकने के लिए बनाया था।

लेकिन इस कानून के बावजूद अभी भी अवैध तरीके से कई अल्ट्रासाउंड सेण्टर लिंग परिक्षण कर रहे हैं। इन परीक्षणों की मुख्य वजह लड़के-लड़की के बीच भेदभाव है जो आज भी भारतीय समाज में अपनी गहरी पैठ बनाए हुए है। इसकी वजह से भारत में महिला-पुरुष अनुपात में अभी भी बहुत अंतर है।

‘हमने 19 कन्या भ्रूण बरामद किये हैं और हम अब उस डॉक्टर की गिरफ़्तारी के लिए दबिश दे रहे हैं जिसने इन परीक्षणों को अंजाम दिया है’, महाराष्ट्र के सांगली जिले के पुलिस अधीक्षक दत्तात्रय शिंदे ने न्यूज़ एजेंसीयों को बताया।

उन्होंने बताया कि ये भ्रूण शनिवार रात को महैसल गाँव में डॉक्टर बाबासाहेब खिद्रपुरे के क्लिनिक के नज़दीक एक नीले रंग के प्लास्टिक थेले में एक सीवर से मिले।

शिंदे ने बताया कि यह बरामदगी तब हुयी जब डॉक्टर के क्लिनिक में एक 26 वर्षीय गर्भवती महिला की गर्भपात के लिए की जा रही सर्जरी के दौरान मौत हो गयी।

‘हमने मृतिका के पति को अपनी पत्नी के ऊपर गर्भपात के लिए दबाव बनाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है’, उन्होंने बताया।

इससे पहले अभी पिछले दिनों उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी कन्या भ्रूण मिलने की घटनाएं सामने आई थी।

हालाँकि इस कानून के बनने से पिछले कुछ समय में लिंग अनुपात में सकारात्मक परिवर्तन देखा गया है। 2001 की जनगणना 933 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष थी, 2011 में यह संख्या बढ़कर 940 महिलाएं हो गयी है।

ज्ञात रहे, भारतीय कानून के मुताबिक बच्चे के माता-पिता और डॉक्टर को जन्म पूर्व लिंग परिक्षण करने के या कराने का आग्रह करने के आरोप में पांच साल तक की जेल की सज़ा हो सकती है।

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