रिज़र्व बैंक ने शरिया बैंकिंग पर मोदी सरकार की राय बताने से किया का इनकार

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नई दिल्ली : देश में शरिया बैंकिंग शुरू करने को लेकर केंद्रीय बैंक की रिपोर्ट पर वित्त मंत्रालय की प्रतिक्रिया का खुलासा करने से रिजर्व बैंक ने इनकार कर दिया है ।
इस्लामिक बैंकिंग पर अंतर विभागीय समूह (आईडीजी) की सिफारिशों पर मंत्रालय द्वारा रिजर्व बैंक को भेजे गये पत्र की प्रति आरटीआई आवेदन के माध्यम से मांगी गयी थी।

वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग से केंद्रीय बैंक ने मालूम किया था कि क्या इस पत्र का खुलासा आरटीआई कानून के तहत किया जा सकता है।जिस पर वित्तीय सेवा विभाग ने सलाह दी कि इस पत्र को साझा नहीं करने की जरूरत है और कानून की धारा 8(1)(सी) के तहत इसकी छूट है। जिससे संसद और राज्य विधानसभाओं के विशेषाधिकार का हनन हो सकता है यह धारा ऐसी सूचना दिए जाने पर रोक लगाती है । इस्लामिक और शरिया बैंकिंग ऐसी वित्तीय प्रणाली है जो ब्याज नहीं लेने के सिद्धान्त पर आधारित है। इस्लाम में ब्याज की मनाही है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 20 नवंबर को देश में पंपरागत बैंकों में धीरे-धीरे ‘इस्लामी बैंक सुविधा’ देने का प्रस्ताव दिया है जिसमें ब्याज-मुक्त बैंकिंग सेवा के प्रावधान किए जा सकते हैं। केंद्र तथा रिजर्व बैंक दोनों ही लंबे समय से देश में समाज के ऐसे लोगों को इस तरह की बैंक सुविधाएं पेश करने की संभावनाओं पर विचार करते रहे हैं जो धार्मिक कारणों से बैंकों से दूर हैं। इस्लामी या शरिया बैंकिग एक प्रकार की वित्त व्यवस्था जो ब्याज नहीं लेने के सिद्धांत पर आधारित है क्योंकि इस्लाम में ब्याज की मनाही है।

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