‘ मृतक ‘ व्यक्ति भी लड़ रहे हैं उत्तर प्रदेश में चुनाव

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मृतक

राहिल हसी

जॉली एलएलबी 2 मूवी देख रहा था। इस मूवी में पहला केस जॉली को एक ऐसे व्यक्ति का मिला जो व्यक्ति ज़िंदा था लेकिन उसकी प्रॉपर्टी हथियाने के लिए उसे मृतक घोषित कर दिया गया था ।

फिल्म के शुरुवात में ही अक्षय कुमार अपनी आवाज़ में बताते है कि फ़िल्म में सभी पात्र और घटनाएँ काल्पनिक है, इसका किसी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है।

जहाँ तक मुझे याद है ये पहली बार देखा गया कि फिल्म का मुख्य किरदार ये लाइने खुद बोल रहा है, क्योंकि बावली सोशल मीडिया और बिकाऊ इलेक्ट्रनिक और प्रिंट मीडिया किसी भी चीज़ पर बखेड़ा खड़ा कर देती है किसी को भी अपनी अराजकता का शिकार बना लेती है ।

ख़ैर फिल्म की कहानी के इस दृश्य से वास्तविकता का सम्बन्ध है और ये संयोग भी नहीं है। इसे इसलिए डाला गया है कि आम जनता तक ये बात पहुँचे। वास्तविकता में आज़मगढ़ के रहने वाले लाल बिहारी ‘ मृतक ’ को 1976 में मृत घोषित कर दिया गया था। जिसके बाद उन्हें खुद को ज़िंदा साबित करने के लिए बड़े पापड़ बेलने पड़े। यहाँ तक की विधान सभा में घुस कर उन्होंने पर्चे फेंके और राजीव गाँधी के ख़िलाफ़ चुनाव तक लड़े। खुद को ज़िंदा साबित करने में उन्हें 18 साल लग गए और अंततः 1994 में उन्हें ज़िंदा माना गया ।

लाल बिहारी मृतक ने इसके बाद एक मृतक संघ बनाया। जिसके देश में हज़ारो लोग सदस्य बने, जिन्हें ज़िंदा होते हुए मृतक घोषित किया गया है। इस बार युपी चुनाव में जब आप वोट देने जायेंगे तो EVM मशीन पर आपके सामने भी एक मृतक कैंडिडेट होगा जो सरकार द्वारा मृत घोषित किया जा चुका है।

मृतक संघ युपी चुनाव में इस बार भी कई सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर रहा है। मृतक संघ चुनाव जीतना नहीं चाहता, बल्कि वो चाहता है कि आप जाने की
“हम अभी ज़िंदा है”।

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