मिन्हाज अंसारी के मामले में कामयाबी, आरोपी पुलिसकर्मी पर हत्या का मुकदमा दर्ज

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मिन्हाज

रांची: झारखण्ड के जामताड़ा में गत वर्ष हिरासत में प्रताड़ना से हुयी मिन्हाज अंसारी की मौत के मामले में कानूनी लड़ाई लड़ रहे संगठन को एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। इस मामले में आरोपी जामताड़ा पुलिस थाने के निलंबित एसएचओ पर अब लगी दंड संहिता की धाराओं में अब हत्या की धारा को भी शामिल कर लिया गया है।

गत वर्ष अक्टूबर के पहले हफ्ते में जामताड़ा निवासी मिन्हाज अंसारी को पुलिस ने व्हात्सप्प समूह में आपत्तिजनक तस्वीरें साझा करने के आरोप में दो अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया था। हिरासत के दौरान मिन्हाज अंसारी के साथ थाने में मार-पीट की गयी थी। जिसके परिणाम स्वरुप रांची के अस्पताल में 9 अक्टूबर को मिन्हाज अंसारी की मौत हो गयी थी।

मिन्हाज की मौत के बाद उसके पिता उमर मियां ने तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए आरोपी एसएचओ के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी थी। शुरू में पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 341, 342, 323, 325, 307, 504, 506, 34 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। लेकिन इसमें हत्या की धारा 302 को शामिल नहीं किया गया था।

इस सम्बन्ध में मानवाधिकार संगठन एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स की झारखण्ड यूनिट, जो मिन्हाज अंसारी के परिवार को क़ानूनी सहायता प्रदान कर रहा था, उसने राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग, झारखण्ड राज्य गृह विभाग और अन्य सम्बंधित विभागों को इस मामले में हो रही लापरवाही से अवगत कराया।

इसके बाद झारखण्ड पुलिस विभाग ने इस मामले में अपनाई जा रही लापरवाही को दूर किया। नतीजन झारखण्ड पुलिस ने अब इस मामलें में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड सहिंता की हत्या की धारा 302 को भी शामिल किया है।

एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स, झारखण्ड के मुख्य संयोजक जियाउद्दीन ने कहा, ‘निसंदेह न्याय हासिल करने की दिशा में यह पहली सफलता है। लेकिन अभी आगे एक लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ी जानी है। जल्द ही ऐपीसीआर की बैठक में बड़े अधिकारीयों से मशवरे के बाद आगे की कानूनी लड़ाई की दिशा तय की जायेगी।’

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