महिला सुरक्षा पर लिखी बातों को अब अमल में लाने की ज़रुरत

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    सांकेतिक तस्वीर

    डॉ नाज़िया नईम,
    इंक्रेडिबल आयुर्वेदा, भोपाल

    सुनो लड़कियों/महिलाओं, फर्क नहीं पड़ता 5 की हो या 50 की। ये मत सोचो कि दुनिया एकदम से असुरक्षित हो गयी है। यह हमेशा से ही ऐसी ही थी। अब ज़्यादा इसलिये लग रही है कि संचार क्रांति से हम वह सब देख जान पा रहे हैं जो पहले ढंका छिपा रह जाता था। कोई कह रहा है छुरा मारो लड़कियों कोई कह रहा है गोली मार दो, काट दो, ये वह, पर ये समय गुस्से के उबाल या मूर्खता की हद तक भावुकता का नहीं है। महिला सुरक्षा पर लाखों बातें कही और सुनी जा चुकी हैं पर अब सीरियसली अमल में लाना शुरू भी कर दो। जो नस्ल तुम्हारे हाथों परवान चढ़ रही है या चढ़ेगी उसे ज़रूर बेहतर इंसान बनाओ और अभी के लिये इन बातों पर ध्यान दो-

    *मोबाइल चलाती हो न, घर से बाहर निकलो तो बैटरी चार्ज और कॉल का बैलेंस हो, ध्यान रखो। बोर होने पर फोन चला चलाकर बैटरी मत बैठाओ। ज़माने भर की एप्स हैं इसमें तो विमेन सिक्युरिटी वाली 2-3 भी डाउनलोड कर लो और अपडेट रखो। बहुत मिल जाएंगी एपस्टोर में जो एक बटन दबाने या शेक करने से आपकी लोकेशन, ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग निकटजनों और पुलिस स्टेशन तक भेजती हैं। महिला हेल्पलाइन का नम्बर सेव रखो। म.प्र. में 1090 है। इतना तो कर लोगी ना?

    *जब कोई सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग की बात करे तो बाहर से इतना बड़ा हाँ और मन में ‘इट्स नॉट माय कप ऑफ टी” वाला रुख मत रखो। सेल्फ डिफेंस ब्लेक बेल्ट मिलना ही नहीं होता। ज़माने भर के वीडियोज़ देखती हो, यू ट्यूब पर सैकड़ों छोटे छोटे आसान ट्रिक्स वाले वीडियो मिल जाएंगे जो हर आपात परिस्थिति से निपटने की प्रभावी मेथड्स बताते हैं। देखोगी और सीखोगी ना??

    *माय बॉडी माय चॉइस के चक्कर में सामान्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी मत करना।कपड़ों से कैरेक्टर जज नहीं होता का ज्ञान देने वाले इमरजेंसी में सहायता के लिये नहीं आयेंगे। कपड़ों के साइकोलॉजिकल प्रभाव खुद पढ़ना समझना और अपने विवेक से तय करना किस मौके पर क्या पहनना है। आमतौर पर लड़कियां किसी लड़के को आकर्षित करने के लिये नहीं बल्कि दूसरी लड़कियों से प्रतिस्पर्धा और ईर्ष्या में ऐसा पहनावा चुन लेती हैं जो उनके ड्रेसिंग सेंस पर ‘?’ लगा देता है। ध्यान रखो, जो पहनो मौके, मौसम और कम्फर्ट को ध्यान में रखते हुए। बेवजह असहज होने की ज़रूरत नहीं। ध्यान रखोगी ना??

    *रिवॉल्वर, चाकू-छुरा अव्यवहारिक हैं हर कोई नहीं रख सकता। पब्लिक प्लेस पर अनुमति भी नहीं होती सामान्यतः। पर पीपर स्प्रे, सिक्युरिटी अलार्म, नेलकटर, पेपर कटर, सिज़र, फोर्क, पिन तो रख ही सकते हैं न। स्कार्फ में भी खूब से पिन लगाकर रखो और मौका पड़ने पर बेझिझक कुशलता से इस्तेमाल करो। देखन में छोटे लगे पर घाव करे गम्भीर। मिल नहीं रहे आसपास तो ऑनलाइन मंगवा लो। अब लिपस्टिक, काजल के साथ पीपर स्प्रे भी रखोगी ना?

    *हमेशा हर वक्त कोई दो व्यक्ति अलग अलग जगह ऐसे हों जिन्हें पता हो तुम कहाँ किसके साथ हो। इसे अपनी आज़ादी पर राशनिंग के तौर पर मत लो। न ईगो का सवाल बनाओ।अपनी लोकेशन की अपडेट देती रहोगी ना??

    *अपने फ्रेंड सर्कल और पुरुषमित्रों के बैकग्राउंड की पूरी जानकारी रखना ज़रूरी है। इसकी अनदेखी मत करो। उनके माता पिता कहाँ रहते हैं क्या करते हैं परिवार में कौन कौन हैं और हो सके तो कॉन्टेक्ट नम्बर। याद रखो जो सच में दोस्त मानता है तुम्हें, ये सब बताने में आनाकानी नहीं करेगा। जो नहीं बताये उस पर शक करने की बहुत वजहें हैं। इन्फो लेकर रखोगी ना??

    *सड़क पर छुई मुई नज़ाकत से या मॉडल जैसी कैट वॉक से न चलो। आर्मी पर्सन जैसे कॉन्फिडेंस से चलो। किसी को खुद को इज़ी टारगेट मानने का मौका नहीं दोगी ना?

    * अपने स्कूल/कॉलेज/ऑफिस के हर वैकल्पिक रास्ते की जानकारी रखो। रास्ता और समय बदलती रहो। शॉर्टकट या समय बचाने को अंधेरे सुनसान रास्तों को मत चुनो।ताकि घात लगाने का मौका न मिले।

    हर सावधानी के बाद भी कोई इमरजेंसी आ पड़े तो इन बातों को याद रखो।

    * दिमाग, कान और आँखे खुली रखो। हर संदिग्ध गतिविधि पर नज़र रखो और मानसिक रूप से तैयार रहो।

    *रोने घबराने की बजाय अपनी ताकत और हमलावर की कमज़ोरी पर फोकस करो। आसपास की किस चीज़ को हथियार बना सकती हो, ध्यान रखो।

    * पीछा होने की स्थिति में बेझिझक आसपास खुली होटल, रेस्त्रां, घर या एटीएम में घुस जाओ, मदद माँगों और फोन करो।

    *गलत दिशा में ले जाते ड्राइवर को फौरन रोक दो, पब्लिक प्लेस पर उतर जाओ। अपनी जानकारी ड्राइवर की समझ में आने वाली भाषा में परिजनों को देना बेहतर रहता है। पहचाने जाने के डर से कुछ गलत करने की हिम्मत नहीं होती। फिर भी न रुके और ड्राइवर का गला चोक करने को दुपट्टा या हैंड बैग न भी हो तो हाथों से कॉलर पर दबाव देकर पीछे खींच सकती हो। ज़रूरत त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और हाथों में जान होने की है।

    *सिर, आंखे, ठुड्डी, सोलर प्लेक्सस(जहाँ पसलियां मिलती हैं और पेट शुरू होता है), प्रायवेट पार्ट्स, पेट का निचला हिस्सा और घुटनों का पिछला हिस्सा नाज़ुक और संवेदनशील जगहें हैं। इन पर वार तुरन्त असरदार होता है।

    *ये याद रखो कि तुम्हारा प्राथमिक लक्ष्य सुपर विमेन बनकर बहादुरी दिखाना या सबक सिखाना नहीं बल्कि उचित मदद मिलने या सुरक्षित होने तक अपनी हिफाज़त करना होना चाहिये।

    (डॉ नाज़िया नईम इनक्रेडिबल आयुर्वेद क्लिनिक में कार्यरत हैं। इससे पहले वे गवर्नमेंट आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में मेडिकल ऑफिसर रह चुकी हैं। डॉ नाज़िया मध्य प्रदेश में हिजामा पद्धिति से इलाज करने वाले अग्रणी चिकित्सकों में शामिल है। डॉ नाज़िया द्वारा लिखित पैरेंटिंग पर एक किताब जल्द ही रिलीज़ होने वाली है।)

     

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