भोजपुर एनकाउंटर को सीबीआई कोर्ट ने बताया फर्जी, चार पुलिसकर्मी दोषी करार

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एनकाउंटर

ग़ाज़ियाबाद: गाज़ियाबाद के मोदीनगर तहसील के भोजपुर थाना क्षेत्र के मछरी गांव में हुए एक फर्जी एनकाउंटर में सीबीआई कोर्ट ने सोमवार को चार पुलिस कर्मियों को दोषी ठहराया है।

यह घटना बीस साल पहले की है। 8 नवम्बर 1996 को भोजपुर पुलिस थाने से सम्बंधित पुलिसकर्मियों ने मछरी गाँव में चार युवको को एक एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था। इस एनकाउंटर में मारे गए युवको की पहचान प्रवेश, जसवीर, जलालुद्दीन और अशोक निवासी मोदीनगर के रूप में हुई थी। इस एनकाउंटर को युवकों के परिजनों और गाँव वालों ने फर्जी बताया था। ग्रामीणों ने इस फर्जी एनकाउंटर के विरोध में सड़क जाम कर इसकी जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी।

ग्रामीणों की मांग को मानते हुए प्रशासन ने इस एनकाउंटर की जांच 1997 में सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने जांच में एनकाउंटर को फर्जी मानते हुए भोजपुर के तत्कालीन एसओ लाल सिंह, दरोगा जोगेंद्र सिंह, कॉन्स्टेबल सूरजभान, रणवीर सिंह और सुभाष को आरोपी बनाया था। इसके बाद सीबीआई ने इन सभी आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी थी।

यह मामला पिछले बीस सालों से कोर्ट में लंबित था। बीस साल तक ट्रायल चलने के बाद अब सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश राजेश चौधरी की अदालत ने भोजपुर थाना के तत्कालीन एसओ लाल सिंह, सब इंस्पेक्टर जोगिंदर सिंह, सिपाही सूर्यभान व सुभाष चंद को दोषी बताया है। कोर्ट में यह माना गया है कि इन सभी पुलिसकर्मियों ने निहत्थे युवकों पर फायरिंग कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था।

इस मामले में सीबीआई ने गवाहों के बयान के आधार पर आईपीएस अधिकारी ज्योति बेलूर को भी केस में सह आरोपी बनाया था। भोजपुर एनकाउंटर केस के बाद ज्योति बेलूर का ट्रांसफर उत्तराखंड कर दिया गया था। इसके बाद वो इस्तीफा देकर ब्रिटेन चली गयी और कोर्ट के कई बार सामान जारी करने पर वापस लौट कर नहीं आयीं।

कोर्ट इस मामले में अब 22 फरवरी को अपना फैसला सुनाएगा।

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