बरी हुए विदेशी जमातियों को उनके मुल्क भेजने में मदद करे केंद्र सरकार : सुप्रीम कोर्ट

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तबलीगी जमात

नई दिल्ली : केंद्र सरकार से, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तबलीगी जमात के उन विदेशी लोगों को जिन्हें कोर्ट ने आरोपों से मुक्त किया है उनके मुल्क जाने में मदद करे। शुक्रवार को दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात में शामिल होने वाले 36 विदेशी जिन पर कथित तौर पर कोरोना महामारी फ़ैलाने का आरोप था बरी कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट को याचिकाकर्ताओं की वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि 36 विदेशी तबलीगी को बरी किया गया है। बरी होने के बाद अपने घर विदेश जाने के लिए इन 36 जमातियों ने आवेदन दिया है।

केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर की अगुवाई वाली बेंच ने कहा है कि वह उन विदेशी जमातियों को उनके मुल्क वापस भेजने में मदद करे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवेदकों के रिप्रजेंटेशन पर जल्दी विचार किया जाए।

सरकार से, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि 36 विदेशी नागरिकों के आवेदनों को रिकॉर्ड में लेने के बाद उनकी वापसी की सुविधा प्रदान की जाये। पीठ ने कहा कि सरकार द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारियों द्वारा भी ऐसा किया जा सकता है।

आरोपी व्यक्तियों द्वारा की गई याचिका जिसमें कहा गया था कि उन्हें विभिन्न स्थानों से उठाया गया था ताकि दुर्भावना से उन पर मुकदमा चलाया जा सके। उनमें से कोई भी प्रासंगिक अवधि के दौरान मरकज़ में मौजूद नहीं था “उचित रूप से संभावित” है। ट्रायल कोर्ट के मुताबिक़ कथित उल्लंघन के मामले में 12 मार्च से 1 अप्रैल के बीच तब्लीगी जमात के मुख्यालय के अंदर किसी भी आरोपी की उपस्थिति को साबित करने में नाकाम रहा।

दिल्ली के चीफ मेट्रोपॉलिटिन मैजिस्ट्रेट एके गर्ग की अदालत ने कहा था कि उनके खिलाफ कोरोना महामारी फैलाने संबधित आरोपों के मद्देनजर सबूत नहीं है। इसलिए इन 36 विदेशी नागरिकों को बरी कर दिया गया। ये लोग कई देशों अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, सूडान, ट्यूनीशिया, श्रीलंका, तंजानिया, यूनाइटेड किंगडम, थाईलैंड, कजाकिस्तान और इंडोनेशिया आए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इन्हें अपने देश जाने के लिए सहूलियत दी जानी चहिए। जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जिन विदेशी नागरिकों को बरी किया गया है अगर उन्हें अपने घर विदेश जाने में कोई समस्या है तो सहायता के लिए उनके वकील चाहें तो उनके ऑफिस में संपर्क कर सकते हैं।

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