ज़ाकिर ही जामिया थे और जामिया ही ज़ाकिर थी

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    डॉ ज़ाकिर हुसैन
    डॉ ज़ाकिर हुसैन

    डॉ ज़ाकिर हुसैन भारत के तीसरे राष्ट्रपति और एक बेहतरीन शिक्षक और राजनीतिज्ञ थे। वे जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के सह-संस्थापक थे।

    उनका जन्म 8 फ़रवरी 1897 को हैदराबाद में हुआ था। वे भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति थे। डॉ ज़ाकिर हुसैन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इटावा के इस्लामिया हाई स्कूल से पूरी की। फिर उन्होंने एंग्लो मुहम्मद ओरिएंटल कॉलेज में दाखिला लिया, जिसे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है।

    1918 में उन्होंने बी.ए. आनर्ज़ पास किया और एम.ए. में दाख़िला लिया लेकिन इसके जल्द ही छोड़ दिया।

    बाद में डॉ ज़ाकिर हुसैन बर्लिन के फ्रेडरिक विलियम विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी प्राप्त करने के लिए जर्मनी चले गए।

    1920 में, 23 वर्ष की आयु में डॉ ज़ाकिर हुसैन ने अलीगढ़ में गांधी जी के आह्वान पर असहयोग आंदोलन में शामिल हुए।

    उन्हें साहित्यिक और अकादमिक कार्यों में गहरी दिलचस्पी थी। 1926 में जामिया मिल्लिया इस्लमिया में शामिल होने के तुरंत बाद, उन्होंने प्लेटो के रिपब्लिक और कैनन की प्राथमिक राजनीतिक अर्थव्यवस्था का उर्दू में अनुवाद किया।

    वे 1926 से 1948 तक लगभग 21 साल जामिया मिल्लिया इस्लमिया के उप कुलपति भी रहे। जामिया उनकी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा थी। उनके बारे में अक्सर कहा जाता था कि ज़ाकिर ही जामिया थे और जामिया ही  ज़ाकिर थी।

    3 अप्रैल 1952 में उन्हें संसद के सदस्य के रूप में चुना गया। 6 जुलाई 1957 से 11 मई 1962 तक उन्होंने बिहार के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएँ दी। 13 मई 1962 को उन्हें भारत के उप राष्ट्रपति के पद पर चुना रहा जिस पर वे 12 मई 1967 तक रहे।

    13 मई 1967 को उन्हें भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुना गया। उनका कार्यकाल 13 मई 1967 से उनकी पुण्यतिथि 3 मई 1969 तक रहा। वे पहले मुस्लिम राष्ट्रपति थे जिनकी मृत्यु पद पर रहते हुए हुयी इसी कारण उनका बतौर राष्ट्रपति कार्यकाल सबसे कम रहा।

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