कब मिलेगी आज़ादी

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मोहम्मद रियाज मलिक, मंडी ,पुंछ

इस समय पूरा देश स्वतंत्रता दिवस के जश्न में डूबा है। हमारे सीमावर्ती जिला पुंछ की चारों तहसीलों में भी स्वतंत्रता दिवस समारोह बड़े उत्साह से आयोजित किया जाएगा। कहीं सार्वजनिक प्रतिनिधि तो कहीं जिला एवं तहसील अधिकारी परेड मैदान पर सलामी देंगें और अपने अपने अंदाज़ में स्वतंत्रता दिवस को  संबोधित भी करेंगे। लेकिन इसी जिले की तहसील मंडी का गांव अड़ाई जो सभी गांव में आबादी के हिसाब से दूसरे नंबर पर स्थित है। गांव अड़ाई मलका में अब भी तानाशाही राज है।

इस संबध में स्थानीय बुजुर्ग मुमताज़ अहमद जिनकी उम्र लगभग 70 साल है कहते हैं “ऐसा लगता है कि अब यह क्षेत्र राजाओं और अमीरों के अधीन है। जहां लोग आज भी केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। भोली- भाली जनता को लालच में फंसाकर राजनीतिक नेता वोट प्राप्त करते हैं और जीत जाने के बाद अपना स्वार्थ पूरा करने में लग जाते हैं।

यह सिलसिला 1950 से लेकर अब तक जारी है। जनता के कई प्रतिनिधि आए और चले गए। लेकिन क्षेत्र की स्थिति नहीं बदली। स्वतंत्रता के इतने साल बाद भी सड़क,  मोबाइल नेटवर्क, स्कूलों में शिक्षकों और स्टाफ की कमी,स्कूली इमारतों की खस्ता हाली जैसी कई समस्याएं वहीं के वहीं बनी हुई हैं। छात्र मुश्किल से दसवीं या बाहरवीं तक ही पढ़ पाते हैं।

पेयजल पाईपें विलुप्त हैं उसकी देखभाल करने वाला लाईन मैन अपने व्यवसाय में व्यस्त है। उद्यान विभाग का संस्थापक मौजूद ही नहीं, वन गार्ड और चोरों की मिलीभगत से पेड़ समाप्त होने की कगार पर हैं। पगडंडियाँ चलने लायक नही है तो  मरीज को कंधों पर उठाकर मंडी अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। यहाँ मजदूरी करने वाले लोग हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और जम्मू जैसे राज्यों में मजदूरी करके अपने बच्चों का पेट पालते हैं। इन परिस्थितियों में इस क्षेत्र का विकास सदियों में नहीं हो सकता है।

उपर्युक्त समस्याओं के मद्देनजर मौलवी मुहम्मद फरीद मलिक जिनके इंडियन आर्मी से अच्छे संबंध होने के अलावा पूरे राज्य में अपनी एक पहचान है। उन्होंने 19 जुलाई 2017 को एक कार्यक्रम में सभी जिला एवं तहसील अधिकारियों को उक्त गांव आमंत्रित किया था। जिसमें भारतीय सेना के ब्रिगेडियर हिलेरी कमांडर अधिकारी डिसूजा, एडिशनल विकास आयुक्त पुंछ, चीफ एजुकेशन अधिकारी, आरिफ इकबाल मलिक, बागवानी अधिकारी आदि देश की आजादी के बाद पहली बार नियुक्त हुए जिन्हें बड़ी मुश्किल से यहाँ तक पैदल लाया गया। जबकि विकास आयुक्त को यहां आने के लिए घोड़े की जरूरत महसूस हुई।

उनके अलावा तहसील प्रशासन अधिकारी आज भी अपना दामन बचाने में सफल रहे। केवल उप तहसीलदार मंडी आबिद हुसैन सनि, जोनल शिक्षा अधिकारी मंडी और थानेदार मंडी अन्ज़र मीर अपनी इच्छा से यहां आएं। जहां गर्वमेंट हाई स्कूल के बच्चों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम पेश किया गया। जिसमें छात्र-छात्राओं ने उर्दू, अंग्रेजी, पहाड़ी, गुर्जर और कश्मीरी भाषाओं में भाषण, कविताएं और गीत पेश किए। जबकि स्कूल के प्रधानाध्यापक खुर्शीद अहमद साबरी और एक छात्र ने धन्यवाद के साथ स्कूल की कठिनाइयों और जरूरतों पर आधारित मेहमानों को एक ज्ञापन भी दिया। उन्होंने कहा कि “इस समय यहाँ मिडिल क्लास तक के शिक्षक है जबकि नौवें और दसवीं के लिए कोई शिक्षक नहीं है”। उन्होंने प्रयोगशाला और सिस्टम, स्पोर्ट्स फील्ड और गेम की आवश्यक वस्तुओं के साथ साथ स्टाफ की मांग की।

छात्रों के कार्यक्रम के बाद उप सरपंच मोहम्मद असलम मलिक द्वारा सभी कठिनाइयों और सार्वजनिक मुद्दों को सुनने के बाद ज्ञापन एडिशनल विकास आयुक्त को सौंप दिया गया। इसके बाद कार्यक्रम में आने वालों का धन्यवाद और न आने वालों के साथ खेद करते हुए मौलवी मुहम्मद फरीद मलिक ने समस्याओं का अंबार मेहमानों के सामने रखा। जिसे सुनकर तो यकीन नही हो रहा था लेकिन वहां जाकर देखने पर जब सामने स्कूल की टूटी- फूटी बिल्डिंग दिखी ता सब साफ हो गया ।

जिसके बाद चीफ एजूकेशन ऑफीसर आरिफ इकबाल मलिक ने स्कूल की दुर्दशा और जनता की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए पचास डेस्क देने का वादा किया। साथ ही स्वीकृत स्टाफ की कमी को पूरा करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने ख़ूबसूरत दृश्यों का जिक्र करते हुए कहा कि “एक नूरी छम( वो झरना जहां नूरजहां नहाया करती थी) के आसपास सारी सरकार और प्रशासन घूम रही है। जबकि इस अड़ाई में कई छम और ताजा पानी के चश्मे और खुबसुरत वादियां हैं। सरकार को इसके लिए ध्यान देना होगा।

ब्रिगेडियरहिलेरी ने कहा कि सेना हमेशा दूरस्थ पहाड़ी और पिछड़े छात्रों की मदद के लिए उपस्थित है। हम इस विद्यालय के लिए कम्प्यूटर देने के लिए सेना को वादा करते हैं शर्त यह कि यहां बिजली प्रणाली को बहाल किया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यहां प्रतिनिधियों को जागृत किया जाए।

एडिशनल विकास आयुक्त ने बच्चों के कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि “कार्यक्रम के दौरान यह महसूस हो रहा था कि किसी शहर के स्कूली बच्चे कार्यक्रम पेश कर रहे हे। सभी तरह की सुविधा का अभाव होने के बावजूद इस तरह का एक अच्छा कार्यक्रम पेश करना प्रशासन के लिए प्रबंधन का एक क्षण है। उन्होंने पिछले परंपरा को दोहराते हुए कहा कि यहां की सड़क परियोजना बनाकर सरकार से स्वीकृति के लिए भेजा जा चुका है, बाकी सड़कों और विकास कार्यों को धन आ जाने पर समापन तक पहुंचाया जाएगा”।

अब सवाल यह है कि  इतने आश्वासनो के बाद भी क्या इस जिले का विकास हो पाएगा और क्या इस जिले को सभी समस्याओं से स्वतंत्रता मिल पाएगी। या स्वतंत्रता मात्र दिवस तक ही सीमित रह जाएगी।

 

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