अमरोहा के सकतपुर में मुसलमानों के तरावीह पढ़ने पर संघ के दबाव में पाबंदी

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अमरोहा, 2 जून 2017

पश्चिमी यूपी में भड़की जातिगत व सांप्रदायिक हिंसा ग्रस्त क्षेत्रों में स्वतंत्र जांच समूह के साथ रिहाई मंच ने दौरा किया। जांच समूह में एससी कम्यूनिटी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण प्रसाद, रिहाई मंच नेता शाहनवाज आलम, सेंटर फॉर पीस स्टडी से सलीम बेग, लेखक व स्तंभकार शरद जायसवाल, पटना हाई कोर्ट के
अधिवक्ता अभिषेक आनंद, इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्ता संतोष सिंह व राजीव यादव शामिल रहे।

बरेली, रामपुर, मुरादाबाद होते हुए संभल और अमरोहा का जांच दल ने सघन दौरा किया। अमरोहा के ग्राम सकतपुर जहां मस्जिद में नमाज को लेकर हिंसा हुई का दौरा करते हुए जांच समूह ने बताया कि 2010 में गौसिया मस्जिद का निर्माण हुआ जहां पहले कच्ची मस्जिद में 2005 से नमाज पढ़ी जाती रही है। मस्जिद के पास के ही रहने वाले अहमद हसन ने बताया कि ईद, बकरीद, अलविदा जुमा, तराबी समेत रोज की पांच समय की नमाजें और जुमे की नमाज लगातार पढ़ी जाती रही है। ग्राम वासियों ने बताया कि ईद की नमाज पर सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस भी लगाई जाती रही है और उन लोगों ने पिछली ईद के नमाज की कुछ तस्वीरें भी दिखाईं।

ग्राम वासियों का कहना है कि आरएसएस से जुड़े भारतीय किसान संघ के मुजफ्फरनगर के सुखपाल राणा जिनका पिछले दिनों पुलिस कर्मी को मारते हुए वीडियो वायेरल हुआ था ने महापंचायत कर ऐलान किया कि मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ने देंगे उसके बाद शाम को नमाज अदा करके जा रहे असगर सैफी पर हमले के बाद तनाव भड़का। गुर्जर समुदाय के युवकों द्वारा किए गए हमले के खिलाफ सैफी ने पुलिस से शिकायत की और ग्रामीण भी थाने गए। मामला पुलिस के सामने आने के बाद भी सतपाल राणा ने सांप्रदायिक हिंदू तत्वों के सैकड़ों लागों के साथ जुलूस निकालते हुए पाकिस्तान का कानून पाकिस्तान में, नहीं चलेगा हिंदुस्तान में जैसे सांप्रदायिक नारे लगाते हुए नमाज नहीं पढ़ने देने और मस्जिद को ढहाने के नारे लगाते रहे।

ग्राम के ही जोगिन्द सिंह ने बताया कि यहां सब कुछ सामान्य था पर कुछ असामाजिक सांप्रदायिक तत्वों ने पूरे गांव का माहौल खराब कर दिया है ऐसे में बहुत से ऐसे लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ है जो लोग इतने बुजुर्ग हैं कि
चल-फिर नहीं सकते। उन्होंने सुखपाल राणा द्वारा की गई पंचायत में शामिल लोगों में अपने 80 वर्षीय बुजर्ग पिता का नाम डालने और उसे वाट्सअप पर प्रसारित करने पर आपत्ती जाहिर की। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को हमारी
पूजा-अर्चना पर कोई आपत्ती नहीं तो हम क्यों नमाज पर आपत्ती करें।

गांव के ही शकील ने कहा कि धारा 144 मुसलमानों के लिए है हिंदुओं के लिए नहीं। उल्टा हम पर 107/16 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है जिसमें 32 लोगों की जमानत हम लोगों ने करवाई है पर उन लोगों ने एक की भी नहीं करवाई है। इससे समझ सकते हैं कि आज भी उन लोगों में कोई डर नहीं है।

गांव के ही मुकेश ने कहा कि नमाज न पढ़ने देने की खबर ने इस गांव को जहां खबरों में लाया है वहीं इससे हम काफी परेशान भी हो गए हैं। कुछ लोगों की जेहनियत की वजह से पूरा गांव बदनाम हो गया है।
जांच समूह ने पाया कि-

1- नमाज पहले से अदा होती रही है पर जिस तरह से यहां इस बात को कहा जा रहा है कि पहले कभी इस घर तो कभी उस घर में नमाज पढ़ी जाती थी वो बताता है कि मुस्लिम समुदाय यहां बहुत दबाव में रहता है जिसके तहत धार्मिक संस्कारों को लेकर वह हिंदू समुदाय से छूट की अपेछा जैसी भावना रखता है। जो उसके धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है।

2- भाजपा नेता सुखपाल राणा द्वारा जुमे के दिन महापंचायत करना और उसको होने देना और नमाज न होने देने के ऐलान के बाद भी पुलिस का सक्रिय न होना और शाम को नमाजी पर सांप्रदायिक हमला स्पष्ट करता है कि पूरी घटना पूर्व नियोजित थी।

3- जिस तरह से पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों पर मुकदमा किया उससे साफ है कि पुलिस इसे हिंदू-मुस्लिम संघर्ष बनाने पर तुली है।

4- सकतपुर में एक ही मस्जिद है जिस पर तनाव के बाद नमाज अदा करने पर पाबंदी है ऐसे में बूढ़े-बुजर्गों को काफी दिक्कत आ रही है क्योंकि वो वहां से 6 किलोमीटर दूर दूसरे गांव के मस्जिद में नहीं जा सकते। वहीं यह
डर भी है कि उन्हें बाहर निकलने पर पीटा भी जा सकता है।

5- किसान संघ के नेता सुखपाल राणा जिन्होंने महापंचायत कर नमाज को लेकर हिंसा भड़काई की अब तक गिरफ्तारी न होना साफ करता है कि उन्हें शासन-प्रशासन का खुला संरक्षण है।

अमरोहा-संभल में दौरा करते हुए ग्राम मनौटा, जिला संभल में पिछले दिनों की एक घटना सामने आई जिसमें मेरठ के एक पीर की मृत्यु के बाद दफनाने का लेकर विवाद हुआ और अंततः उन्हें वहां दफन नहीं किया गया।

मनौटा के असलम ने कहा कि पीर साहब का कहना था कि उनके मुरीद इसी इलाके के हैं ऐसे में उनको यहीं दफन किया जाए। ऐसे में मेरे पिता आरिफ साहब ने अपनी जमीन भी दी और वहां दफन करने के लिए कब्र खोदा ही जा रहा था कि पुलिस आ गई और उसने कहां की इस पर दूसरे समुदाय के लोगों की आपत्ती है इसलिए इनको यहां नहीं दफनाया जा सकता। ऐेसे में उनके मुरीद शव को लेकर चले गए।

जांच समूह ने ठीक इसी तरह पाया कि बिजनौर के बढ़ापुर में तरावीह को लेकर विवाद हुआ।

पष्चिमी यूपी का दौरा करते हुए जांच समूह ने कहा कि योगी सरकार के आने के बाद आरएसएस व भाजपा अपने आनुसांगिक संगठनों के जरिए कम तीव्रता वाले ऐसे तनाव पैदा कर रहे हैं जिससे कि समाज में डर व दहशत का माहौल बरकरार रहे। जिससे वे इस बात को भी कह सकें कि उन्होंने स्थिति पर नियंत्रण कर लिया। आरएसएस से जुड़े सुखपाल राणा द्वारा तनाव पैदा करने के बाद उन पर अब तक कोई कार्रवाई न होना इसे पुष्ट करता है। आखिर जब तनाव पैदा करने वाले आरएसएस व भाजपा के हैं ऐसे में उन पर कोई प्रशासनिक कार्रवाई न होने के
चलते जहां सांप्रदायिक तत्वों का मनोबल बढ़ा है और अन्य घटना करने पर उतारु हैं तो ऐसे में समझा जा सकता है कि आम जनता का क्या हाल है।

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